इबादत

मन से की है इबादत तेरी

अश्कों ने तेरा नाम लिया है,

सूनेपन की घड़ियों में बस

इस दिल ने तुझको याद किया है ।।

एक शांति छाई रहती है

हो कितने भी शोर यहाँ,

जो तू दीए जलाए नहीं

है अंधेरा घनघोर यहाँ ।

सूरज देखा उठकर मैंने

और चंदा देख तेरा नाम लिया है,

मन से करके इबादतें तेरी

मैंने तुझको याद किया है ।।

कर दूं मैं इज़हार कैसे

कि जता दूं मैं इश्क सारा,

मुश्किल हो जो वक्त तो भी

मेरे आँसू धो दें गम तुम्हारा ।

एक दूजे को बसा के दिल में अपने

वो साथ हैं ये यकीन किया है,

मन से करके इबादतें तेरी

मैंने तुझको याद किया है ।।

हाथों से फिसलती रेत सी

एक वक्त ऐसे बीत गया,

खुशियां गम की झड़ी लगा के

देकर एक प्यारा मीत गया ।

शिकायत नहीं उस वक्त से मुझको

उसने तुझको मेरे साथ किया है,

मन से करके इबादतें तेरी

मैंने तुझको याद किया है ।।

आपकी बातों से दिल मुस्कुराता है

आपकी बातों से दिन बन जाता है,

आपकी बातों से ही मचलता है मन

आपकी बातों पर ही प्यार आता है ।

दो दिलों की दुनिया हमारी प्रेयसी

हमने एहसासों से आबाद किया है,

मन से करके इबादतें तेरी

मैंने तुझको याद किया है ।।

है हिज्र नहीं ये ऐ प्रेयसी

ये तो है एक जीवन पड़ाव,

एक दूजे की खातिर बनने को

न रह जाए कहीं कोई अभाव ।

हम कदम-कदम पर साथ चले हैं

जैसे हाथों में हाथ बांध लिया है,

मन से करके इबादतें तेरी

मैंने तुझको याद किया है ।।

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