सफर

बेअसर से हो रहे वो शब्द

सालों जिन्होंने समझाया मुझे,

राह खत्म जो होने को है

नई राह के मायने बताया मुझे ।

एक हसीन सफर के साक्षी

ऐ प्रेयसी हैं हम और तुम,

बिन राह का आकाश है फिर भी,

एक पंछी कभी ना होता गुम ।

फिर क्यों गुमसुम हो जाता हूँ

क्यों ना मैं समझाता हूँ,

मंजिल में है वक्त अभी,

समझ के भी कराहता हूँ ।

शक्ति देना हमें खुदाया

हो हमें सहारा प्यार का,

जब कभी सर्द हिज्र सताए

मिल जाए धूप इज़हार का ।

यह खुमारी ना कम होने पाए

एहसासों से उन्हें गले लगाए

हो जब भी दिल की पुकार

हम मिले खड़े बाहें फैलाए ।।

S

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