तप

बनकर यादों की एक नदिया वो पल मुझमें बहते हैं, चलो फिर से लौट चलें यही हरदम कहते हैं । मैं खड़ा सुन्न बस देख रहा तू… Read more “तप”

लौ

पढ़-पढ़ कर तुझको मैंने प्रेयसी लिखे तो वैसे पन्ने सौ, पर फिर भी दिल में जलती है इश्क-ए-कलम की देखो लौ ।। तुम सागर जैसे प्रेम का… Read more “लौ”